Janmashtami 2026 शुक्रवार, 4 सितंबर को मनाई जाएगी, 3 सितंबर को नहीं। नई दिल्ली पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 4 सितंबर सुबह 2:25 बजे से 5 सितंबर रात 12:13 बजे तक रहेगी। निशिता पूजा 4 सितंबर रात 11:57 बजे से 5 सितंबर 12:43 बजे तक और व्रत पारण 5 सितंबर सुबह 6:01 बजे के बाद होगा।
दिल्ली, वृंदावन और बेंगलुरु के आधिकारिक ISKCON स्रोत भी मुख्य जन्माष्टमी उत्सव 4 सितंबर को बता रहे हैं। अगले दिन 5 सितंबर को नंदोत्सव और दही हांडी मनाई जाएगी। शहर के अनुसार पूजा मुहूर्त कुछ मिनट बदल सकता है, इसलिए नीचे दिए समय को नई दिल्ली reference मानें।

Janmashtami 2026 Date and Time: एक नजर में
| जानकारी | नई दिल्ली के अनुसार तारीख और समय |
|---|---|
| जन्माष्टमी व्रत | शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 |
| अष्टमी तिथि आरंभ | 4 सितंबर, सुबह 2:25 बजे |
| अष्टमी तिथि समाप्त | 5 सितंबर, रात 12:13 बजे |
| रोहिणी नक्षत्र आरंभ | 4 सितंबर, रात 12:29 बजे |
| रोहिणी नक्षत्र समाप्त | 4 सितंबर, रात 11:04 बजे |
| निशिता पूजा मुहूर्त | 4 सितंबर 11:57 PM–5 सितंबर 12:43 AM |
| मध्यरात्रि क्षण | 5 सितंबर, रात 12:20 बजे |
| व्रत पारण | 5 सितंबर, सुबह 6:01 बजे के बाद |
| नंदोत्सव/दही हांडी | शनिवार, 5 सितंबर 2026 |

Location note: तिथि का सामान्य क्रम समान रहता है, लेकिन निशिता काल, सूर्योदय और पारण का समय स्थान के अनुसार बदलता है। दूसरे शहर का exact timing अपने शहर पर लागू न करें।
जन्माष्टमी 2026 में 3 या 4 सितंबर को है?
2026 में कृष्ण जन्माष्टमी की सही तारीख 4 सितंबर, शुक्रवार है। 3 सितंबर को लेकर भ्रम अलग-अलग websites की incomplete calculations, location settings या उत्सव की पूर्व-संध्या को date में शामिल करने से बन रहा है। नई दिल्ली की पंचांग गणना में अष्टमी तिथि 4 सितंबर सुबह 2:25 बजे शुरू होती है और उसी रात निशिता काल में बनी रहती है। इसलिए व्रत और मध्यरात्रि जन्मोत्सव 4 सितंबर को होगा।
इसे आसान भाषा में ऐसे समझें:
- 3 सितंबर: जन्माष्टमी व्रत का मुख्य दिन नहीं। कुछ मंदिरों में उत्सव की तैयारी या प्रारंभिक कार्यक्रम हो सकते हैं।
- 4 सितंबर: जन्माष्टमी व्रत, रोहिणी नक्षत्र और रात में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव।
- 5 सितंबर: रात 12 बजे के बाद पूजा का समापन, सुबह पारण तथा दिन में नंदोत्सव/दही हांडी।
किसी स्थानीय मंदिर का कार्यक्रम 3 और 4 सितंबर दोनों दिन चल सकता है, लेकिन इससे जन्माष्टमी की मुख्य तारीख 3 सितंबर नहीं हो जाती। उदाहरण के लिए ISKCON Bangalore का आयोजन 3–4 सितंबर है, जबकि midnight celebration 4 सितंबर को है।
अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का क्या महत्व है?
धार्मिक परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि से जोड़ा जाता है। इसी कारण जन्माष्टमी तय करते समय केवल सूर्योदय की तारीख नहीं, बल्कि निशिता काल में अष्टमी की उपलब्धता भी देखी जाती है।
नई दिल्ली reference में 4 सितंबर की रात निशिता पूजा के समय अष्टमी तिथि उपस्थित रहेगी। रोहिणी नक्षत्र भी 4 सितंबर रात 11:04 बजे तक रहेगा। इसका अर्थ है कि रोहिणी नक्षत्र निशिता मुहूर्त शुरू होने से पहले समाप्त हो जाएगा, लेकिन अष्टमी तिथि मध्यरात्रि पूजा के समय मौजूद रहेगी। इसीलिए पंचांग 4 सितंबर को व्रत और जन्मोत्सव के लिए निर्धारित करता है।
Janmashtami 2026 Nishita Puja Muhurat: प्रमुख शहरों का समय
निशिता काल हिंदू समय-गणना में मध्यरात्रि के आसपास का विशेष काल है। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, अभिषेक, भोग और आरती इसी समय की जाती है। प्रमुख शहरों के local timings:
| शहर | निशिता पूजा मुहूर्त |
| नई दिल्ली | 4 सितंबर 11:57 PM–5 सितंबर 12:43 AM |
| जयपुर | 5 सितंबर 12:03 AM–12:49 AM |
| मुंबई | 5 सितंबर 12:14 AM–1:01 AM |
| कोलकाता | 4 सितंबर 11:13 PM–11:59 PM |
| बेंगलुरु | 4 सितंबर 11:55 PM–5 सितंबर 12:42 AM |
| अहमदाबाद | 5 सितंबर 12:16 AM–1:02 AM |
यदि आपका शहर table में नहीं है, तो Drik Panchang पर location बदलकर समय देखें। केवल “12 बजे पूजा” मान लेना ठीक नहीं, क्योंकि वास्तविक निशिता काल शहर के अनुसार पहले या बाद में हो सकता है।
Janmashtami 2026 का व्रत कब रखें?
जन्माष्टमी का व्रत 4 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। सामान्य रूप से भक्त सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेते हैं, दिनभर भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करते हैं और रात में निशिता पूजा के बाद जन्मोत्सव मनाते हैं।
व्रत के नियम परिवार और संप्रदाय के अनुसार अलग हो सकते हैं। कुछ भक्त निर्जल व्रत करते हैं, जबकि अन्य फल, दूध, दही या अनुमत फलाहार लेते हैं। स्वास्थ्य समस्या, गर्भावस्था, दवा या अधिक उम्र की स्थिति में कठोर उपवास करना जरूरी नहीं है। अपनी क्षमता और चिकित्सकीय जरूरत को प्राथमिकता दें।
Janmashtami 2026 Parana Time: व्रत कब खोलें?
नई दिल्ली पंचांग के अनुसार धर्मशास्त्रीय पारण 5 सितंबर सुबह 6:01 बजे के बाद किया जा सकता है, क्योंकि अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएंगे। देव पूजा, विसर्जन और परिवार की परंपरा पूरी करने के बाद पारण करें।
कई परिवार आधुनिक प्रचलन में मध्यरात्रि जन्मोत्सव और आरती के बाद प्रसाद लेकर व्रत खोलते हैं। दोनों practices को एक ही नियम मानना सही नहीं है:
- धर्मशास्त्रीय पारण: 5 सितंबर, सूर्योदय के बाद 6:01 बजे से।
- मध्यरात्रि के बाद पारण: कुछ परिवारों की प्रचलित परंपरा; अपने कुल नियम के अनुसार करें।
यदि आपके परिवार में हर वर्ष निर्धारित विधि अपनाई जाती है, तो केवल internet timing देखकर उसे न बदलें।
ISKCON Janmashtami 2026 कब है?
2026 में दिल्ली और वृंदावन के आधिकारिक ISKCON pages जन्माष्टमी की तारीख 4 सितंबर बता रहे हैं। इसलिए “ISKCON में 5 सितंबर को जन्माष्टमी है” वाली सामान्य धारणा 2026 के लिए इन मंदिरों पर लागू नहीं होती।
| मंदिर/संस्था | आधिकारिक जानकारी |
| ISKCON Delhi | 4 सितंबर; व्रत midnight तक |
| ISKCON Vrindavan | 4 सितंबर; मुख्य जन्माष्टमी observance |
| ISKCON Bangalore | 3–4 सितंबर celebrations; 4 सितंबर midnight arati |
मंदिरों के दर्शन, entry, parking और कार्यक्रम के exact timings बदल सकते हैं। जाने से पहले मंदिर की official website या social handle पर उसी दिन का notice जरूर देखें।
घर पर जन्माष्टमी पूजा कैसे करें?
पूजा-विधि कुल, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार बदल सकती है। घर पर सरल पूजा का सामान्य क्रम:
- पूजा स्थान तैयार करें: स्थान साफ करके चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएं और बाल गोपाल को स्थापित करें।
- व्रत का संकल्प लें: सुबह भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करके अपनी क्षमता के अनुसार व्रत का संकल्प लें।
- झूला और श्रृंगार करें: बाल गोपाल को वस्त्र, मुकुट, मोरपंख और फूलों से सजाकर झूले में विराजमान करें।
- निशिता काल की तैयारी करें: पूजा सामग्री, पंचामृत, जल, वस्त्र, तुलसी और भोग पहले से तैयार रखें।
- अभिषेक करें: परंपरा में हो तो दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से अभिषेक करें; बाद में स्वच्छ जल से स्नान कराएं।
- वस्त्र और तिलक लगाएं: बाल गोपाल को साफ वस्त्र पहनाकर चंदन या रोली का तिलक लगाएं।
- भोग अर्पित करें: माखन-मिश्री, फल, पंजीरी या घर में बना सात्विक भोग तुलसी दल के साथ अर्पित करें।
- आरती और जन्मोत्सव मनाएं: भजन, कृष्ण नाम-स्मरण और आरती के बाद झूला झुलाएं तथा प्रसाद बांटें।

मंत्र या विस्तृत षोडशोपचार विधि ज्ञात न हो तो गलत उच्चारण का दिखावा करने की जरूरत नहीं है। सरल कृष्ण नाम-स्मरण, स्वच्छता और श्रद्धा के साथ पूजा करें; विस्तृत कर्म के लिए योग्य आचार्य से मार्गदर्शन लें।
जन्माष्टमी पूजा सामग्री
घर की पूजा के लिए सामान्य सामग्री:
- बाल गोपाल की मूर्ति, चौकी और झूला
- स्वच्छ वस्त्र, मुकुट, मोरपंख और आभूषण
- पंचामृत के लिए दूध, दही, घी, शहद और शक्कर
- गंगाजल या स्वच्छ जल
- चंदन/रोली, अक्षत, फूल और माला
- तुलसी दल
- दीपक, घी/तेल, बत्ती और धूप
- माखन-मिश्री, फल, पंजीरी और सात्विक मिठाई
- पूजा की थाली, घंटी और शंख, यदि घर की परंपरा में हों
सभी वस्तुएं अनिवार्य नहीं हैं। अपनी क्षमता और परिवार की पूजा-पद्धति के अनुसार सामग्री रखें; महंगा श्रृंगार पूजा की शर्त नहीं है।
जन्माष्टमी व्रत में क्या खाएं और क्या न खाएं?
फलाहार करने वाले भक्त सामान्यतः फल, दूध, दही, मखाना, सूखे मेवे, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े से बने व्यंजन और सेंधा नमक लेते हैं। अलग परिवारों में अनुमत चीजें बदल सकती हैं।
व्रत में सामान्य अनाज, दाल, गेहूं, चावल, प्याज-लहसुन और साधारण नमक से बचने की परंपरा है। Packaged food में सामान्य नमक या अनाज मिला हो सकता है, इसलिए label देखें। यदि डॉक्टर ने नियमित भोजन या दवा के साथ खाने की सलाह दी है, तो स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाला उपवास न करें।
दही हांडी और नंदोत्सव 2026 कब है?
दही हांडी और नंदोत्सव शनिवार, 5 सितंबर 2026 को हैं। नंदोत्सव भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के अगले दिन नंद बाबा के आनंदोत्सव से जुड़ा है। महाराष्ट्र और कुछ अन्य क्षेत्रों में इसी दिन दही हांडी के आयोजन होते हैं।
इसलिए 5 सितंबर की तारीख देखकर उसे जन्माष्टमी व्रत की दूसरी तारीख न समझें। 4 सितंबर को जन्माष्टमी और midnight celebration है; 5 सितंबर को अगली सुबह पारण तथा दिन में नंदोत्सव/दही हांडी है।
Janmashtami 2026 FAQs
2026 में जन्माष्टमी किस तारीख को है?
जन्माष्टमी शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को है। मुख्य मध्यरात्रि पूजा 4 सितंबर रात से 5 सितंबर की शुरुआत के बीच होगी।
जन्माष्टमी 3 सितंबर को है या 4 सितंबर को?
नई दिल्ली पंचांग और प्रमुख ISKCON मंदिरों के अनुसार मुख्य जन्माष्टमी 4 सितंबर को है। 3 सितंबर को कुछ मंदिरों में प्रारंभिक celebrations हो सकते हैं।
नई दिल्ली में जन्माष्टमी पूजा का समय क्या है?
नई दिल्ली में निशिता पूजा मुहूर्त 4 सितंबर रात 11:57 बजे से 5 सितंबर रात 12:43 बजे तक है।
Janmashtami 2026 का पारण कब है?
नई दिल्ली reference में धर्मशास्त्रीय पारण 5 सितंबर सुबह 6:01 बजे के बाद है। परिवार की परंपरा अलग हो तो उसी के अनुसार करें।
क्या ISKCON में जन्माष्टमी 5 सितंबर को है?
नहीं। 2026 में ISKCON Delhi और ISKCON Vrindavan जन्माष्टमी 4 सितंबर को बता रहे हैं। 5 सितंबर को नंदोत्सव है।
दही हांडी 2026 कब है?
दही हांडी शनिवार, 5 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। यह जन्माष्टमी के अगले दिन का उत्सव है।
क्या रात 12 बजे व्रत खोल सकते हैं?
कुछ परिवार मध्यरात्रि पूजा के बाद प्रसाद लेकर व्रत खोलते हैं, जबकि धर्मशास्त्रीय पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है। अपने परिवार की परंपरा को प्राथमिकता दें।
निष्कर्ष
Janmashtami 2026 की मुख्य तारीख शुक्रवार, 4 सितंबर है। नई दिल्ली में निशिता पूजा 4 सितंबर रात 11:57 बजे से 5 सितंबर 12:43 बजे तक होगी और धर्मशास्त्रीय पारण 5 सितंबर सुबह 6:01 बजे के बाद किया जा सकता है। नंदोत्सव और दही हांडी 5 सितंबर को होंगे।
तिथि और मुहूर्त शहर के अनुसार बदल सकते हैं। पूजा या व्रत से पहले अपने शहर का पंचांग और परिवार की परंपरा जरूर जांचें।
स्रोत और तथ्य-जांच
- Drik Panchang — Krishna Janmashtami 2026, New Delhi
- ISKCON Delhi — Sri Krishna Janmashtami 2026
- ISKCON Bangalore — Janmashtami 3–4 September 2026
- ISKCON Vrindavan — Janmashtami 2026
धार्मिक सूचना: यह लेख सामान्य पंचांग और शैक्षिक जानकारी देता है। स्थानीय समय और पूजा-विधि स्थान, कुल और संप्रदाय के अनुसार बदल सकती है। व्यक्तिगत धार्मिक निर्णय के लिए स्थानीय पंचांग या योग्य आचार्य से पुष्टि करें।
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