Nirjala Ekadashi 2027 सोमवार, 14 जून 2027 को मनाई जाएगी। यह ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। नई दिल्ली के लिए व्रत का पारण मंगलवार, 15 जून को किया जाएगा। धार्मिक परंपरा में इसे पांडव एकादशी, भीमसेनी एकादशी और भीम एकादशी भी कहा जाता है। ये अलग-अलग त्योहार नहीं, बल्कि इसी एकादशी के प्रचलित नाम हैं।
यहां तिथि, पारण, पूजा विधि, कथा और व्रत की जरूरी सावधानियां जानें।

निर्जला एकादशी की तारीख और दिन: Quick Answer
अगर आप केवल यह जानना चाहते हैं कि Nirjala Ekadashi 2027 kab hai, तो इसका सीधा उत्तर है:
| जानकारी | उत्तर |
|---|---|
| निर्जला एकादशी की तारीख | 14 जून 2027 |
| दिन | सोमवार |
| हिंदू तिथि | ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी |
| पारण का दिन | 15 जून 2027, मंगलवार |
| अन्य नाम | पांडव, भीमसेनी और भीम एकादशी |
इसलिए Nirjala Ekadashi 2027 date in India 14 जून है। 15 जून व्रत रखने की तारीख नहीं, बल्कि पारण का दिन है।
एकादशी तिथि और पारण समय
नई दिल्ली को reference location मानते हुए 2027 की प्रमुख तिथि और समय इस प्रकार हैं:
| पंचांग जानकारी | तारीख और समय |
|---|---|
| एकादशी तिथि आरंभ | 14 जून 2027, लगभग 2:12 AM |
| एकादशी तिथि समाप्त | 15 जून 2027, लगभग 2:08 AM |
| व्रत रखने की तारीख | 14 जून 2027, सोमवार |
| हरि वासर समाप्त | 15 जून, लगभग 8:15 AM |
| पारण का समय | 15 जून, 1:45 PM से 4:32 PM |
यह समय नई दिल्ली के Panchang calculation पर आधारित है। शहर और पंचांग परंपरा के अनुसार पारण बदल सकता है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग या मंदिर से भी पुष्टि करें। अलग-अलग sources के समय जोड़कर नया मुहूर्त न बनाएं।
निर्जला एकादशी 14 या 15 जून को है?
व्रत 14 जून को रखा जाएगा क्योंकि सूर्योदय के समय एकादशी रहेगी। तिथि 15 जून को लगभग 2:08 AM पर समाप्त होगी, लेकिन व्रत द्वादशी पर पारण करके पूरा होता है। इसलिए 15 जून पारण की तारीख है, मुख्य व्रत की नहीं।
Nirjala Ekadashi क्या है?
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। “निर्जला” का अर्थ है जल के बिना। पारंपरिक विधान में व्रती अन्न के साथ जल भी ग्रहण नहीं करता और द्वादशी पर पारण करके व्रत पूरा करता है।
धार्मिक मान्यता में इसे अन्य एकादशी व्रतों के समान पुण्य देने वाला माना गया है। निर्जल रहना सभी लोगों के लिए सुरक्षित या अनिवार्य नहीं है।
Pandava Nirjala Ekadashi 2027 क्या अलग है?
Pandava Nirjala Ekadashi 2027 कोई अलग त्योहार नहीं है। निर्जला एकादशी को ही पांडव एकादशी, भीम एकादशी या भीमसेनी एकादशी कहा जाता है। ये नाम महाभारत से जुड़ी भीम और महर्षि वेदव्यास की कथा के कारण प्रचलित हुए।
इसलिए “पांडव निर्जला एकादशी 2027 कब है?” का उत्तर भी 14 जून 2027 है। इसके लिए अलग दिन या अलग व्रत खोजने की आवश्यकता नहीं है।
व्रत से एक दिन पहले क्या करें?
निर्जला एकादशी की तैयारी दशमी से शुरू करने की परंपरा है। दशमी के दिन अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार सात्त्विक भोजन लिया जा सकता है। मन को शांत रखते हुए भगवान विष्णु का स्मरण करें और अगले दिन किस प्रकार का व्रत रखना है, इसका संकल्प अपनी क्षमता के अनुसार लें।
पहली बार व्रत रखने वाले केवल दूसरों को देखकर निर्जल रहने का निर्णय न लें। व्रत का स्वरूप परंपरा, उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार अलग हो सकता है।
निर्जला एकादशी व्रत और पूजा विधि
घर पर भगवान विष्णु की सरल पूजा इस प्रकार की जा सकती है:
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान साफ करें।
- भगवान विष्णु या लक्ष्मी-नारायण की तस्वीर अथवा प्रतिमा स्थापित करें।
- दीपक और धूप जलाकर भगवान का ध्यान करें।
- उपलब्धता के अनुसार पीले फूल, तुलसी दल, फल, जल और पीली मिठाई अर्पित करें। तुलसी अर्पित करते समय अपने परिवार की धार्मिक परंपरा का पालन करें।
- श्रद्धानुसार
ॐ नमो भगवते वासुदेवायमंत्र का जप करें। मंत्र की कोई निश्चित संख्या सभी लोगों के लिए अनिवार्य नहीं है। - निर्जला एकादशी की कथा पढ़ें या सुनें और भगवान विष्णु की आरती करें।
- दिनभर क्रोध, कटु वचन और अनावश्यक विवाद से बचते हुए भजन या नाम-स्मरण में समय बिताएं।
- अपनी क्षमता के अनुसार जल कलश, फल, वस्त्र या उपयोगी वस्तुओं का दान करें।
सभी सामग्री न हो तो दीप, जल और फूल से भी पूजा की जा सकती है। महंगी सामग्री या बड़ा अनुष्ठान अनिवार्य नहीं है।

निर्जला व्रत में क्या खाएं और क्या न खाएं?
निर्जला व्रत का पारंपरिक स्वरूप अन्न और जल के त्याग से जुड़ा है। फिर भी हर व्यक्ति की स्थिति एक जैसी नहीं होती। व्रत रखने के सामान्य विकल्प इस प्रकार समझे जा सकते हैं:
| व्रत का प्रकार | सामान्य तरीका |
|---|---|
| पारंपरिक निर्जल व्रत | अन्न और जल दोनों का त्याग |
| जलाहार | आवश्यकता और परंपरा के अनुसार जल ग्रहण करना |
| फलाहार | फल, दूध या अनुमत सात्त्विक पदार्थ लेना |
| स्वास्थ्य के अनुसार व्रत | डॉक्टर की सलाह और व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार बदलाव |
फलाहार या जलाहार में अपने परिवार के नियमों के अनुसार सामग्री चुनें। हल्का व्रत रखने वाले व्यक्ति की श्रद्धा पर निर्णय देना उचित नहीं है।
निर्जला एकादशी 2027 का पारण कब और कैसे करें?
नई दिल्ली के reference Panchang के अनुसार पारण 15 जून 2027 को दोपहर 1:45 बजे से शाम 4:32 बजे तक किया जा सकता है। हरि वासर द्वादशी का प्रारंभिक भाग माना जाता है और सामान्य परंपरा में इसके समाप्त होने के बाद पारण किया जाता है।
पारण से पहले भगवान विष्णु की पूजा करके भोग लगाएं। इसके बाद परिवार की परंपरा के अनुसार जल या तुलसीयुक्त जल ग्रहण कर व्रत खोला जा सकता है। फिर हल्का और सात्त्विक भोजन लें। लंबे उपवास के तुरंत बाद बहुत भारी भोजन करना उचित नहीं माना जाता।
पारण का समय शहर और पंचांग पद्धति के अनुसार बदल सकता है। यदि आपके स्थानीय मंदिर या परिवार के गुरु द्वारा अलग समय बताया गया है, तो अपनी परंपरा के अनुसार पुष्टि करके पारण करें।
Pandava Nirjala Ekadashi की कथा
धार्मिक कथा के अनुसार भीमसेन को बहुत भूख लगती थी। परिवार के अन्य सदस्य एकादशी व्रत रखते थे, लेकिन भीम के लिए बार-बार उपवास करना कठिन था। इससे वे चिंतित थे।
भीम ने अपनी समस्या महर्षि वेदव्यास को बताई और ऐसा उपाय पूछा जिससे वे एकादशी व्रत की परंपरा का पालन कर सकें। कथा के अनुसार वेदव्यास ने उन्हें ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी पर अन्न और जल त्यागकर कठिन निर्जल व्रत रखने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि श्रद्धापूर्वक किया गया यह एक व्रत वर्ष की अन्य एकादशियों के पुण्य के समान फल देने वाला माना गया है।
भीमसेन ने इस व्रत का पालन किया। इसी कारण इसे भीमसेनी, भीम या पांडव एकादशी कहा गया। कथा का संदेश संकल्प, आत्मसंयम और विष्णु भक्ति है।

निर्जला एकादशी पर दान और धार्मिक महत्व
निर्जला एकादशी ज्येष्ठ मास की गर्मी में आती है, इसलिए इस दिन जल-सेवा और जरूरतमंद लोगों को उपयोगी वस्तुएं देने की परंपरा का विशेष उल्लेख मिलता है। श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार जल से भरा कलश, छाता, पंखा, वस्त्र, फल या भोजन दान कर सकते हैं। सार्वजनिक स्थान पर पीने के पानी की व्यवस्था करना भी उपयोगी सेवा हो सकती है।
यह व्रत आत्मसंयम, दया और विष्णु भक्ति से जुड़ा है। दान क्षमता और वास्तविक जरूरत देखकर करें।

Ganga Dussehra और Nirjala Ekadashi में अंतर
2027 में दोनों पर्व लगातार दो दिनों में आने के कारण confusion हो सकता है, लेकिन ये अलग धार्मिक अवसर हैं:
| पर्व | 2027 की तारीख | मुख्य संबंध |
|---|---|---|
| गंगा दशहरा | 13 जून 2027 | मां गंगा, पवित्र स्नान और दान |
| निर्जला एकादशी | 14 जून 2027 | भगवान विष्णु और एकादशी व्रत |
गंगा दशहरा दशमी तिथि से और निर्जला एकादशी उसके अगले दिन आने वाली ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी से संबंधित है। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें: Ganga Dussehra 2027 की तारीख, स्नान और पूजा विधि
निर्जल उपवास रखते समय जरूरी सावधानी
बिना पानी का लंबा उपवास हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित नहीं होता। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं, chronic illness वाले लोगों और नियमित दवा लेने वालों को निर्जल व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
बहुत तेज प्यास, चक्कर, सिरदर्द, अत्यधिक कमजोरी, गहरे रंग का पेशाब या सामान्य से बहुत कम पेशाब dehydration के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में धार्मिक दबाव के कारण लक्षणों को नजरअंदाज न करें। स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और जरूरत हो तो व्रत रोककर पानी लें तथा medical help प्राप्त करें। श्रद्धा का अर्थ अपने शरीर को अनावश्यक जोखिम में डालना नहीं है।
निर्जला एकादशी 2027 FAQs
निर्जला एकादशी 2027 में कब है?
निर्जला एकादशी 2027 सोमवार, 14 जून 2027 को है। यह ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है।
निर्जला एकादशी 2027 की तारीख क्या है?
भारत में निर्जला एकादशी का व्रत 14 जून 2027 को रखा जाएगा और इसका पारण अगले दिन 15 जून को होगा।
पांडव निर्जला एकादशी 2027 कब है?
पांडव निर्जला एकादशी भी 14 जून 2027 को है। पांडव, भीमसेनी और भीम एकादशी Nirjala Ekadashi के ही दूसरे नाम हैं।
When is Nirjala Ekadashi in 2027?
Nirjala Ekadashi in 2027 will be observed in India on Monday, June 14, 2027. The fast will be broken on June 15 during the applicable local Parana window.
निर्जला एकादशी 2027 का पारण कब है?
पारण मंगलवार, 15 जून 2027 को होगा। नई दिल्ली के reference time के अनुसार पारण दोपहर 1:45 बजे से शाम 4:32 बजे तक किया जा सकता है। अपने शहर के समय की अलग से पुष्टि करें।
क्या सभी के लिए निर्जल व्रत रखना जरूरी है?
नहीं। निर्जल व्रत धार्मिक परंपरा का कठिन स्वरूप है, लेकिन यह सभी लोगों के लिए अनिवार्य नहीं है। उम्र, स्वास्थ्य, दवा और व्यक्तिगत क्षमता को ध्यान में रखते हुए जलाहार, फलाहार या सामान्य पूजा का विकल्प चुना जा सकता है।
निष्कर्ष
Nirjala Ekadashi 2027 सोमवार, 14 जून को मनाई जाएगी और पारण 15 जून को होगा। यह ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी है और इसे पांडव, भीम तथा भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। भगवान विष्णु की पूजा, कथा, आत्मसंयम और दान इस पर्व की प्रमुख परंपराएं हैं। निर्जल व्रत रखने का निर्णय अपनी धार्मिक परंपरा के साथ उम्र और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर ही करें।
Last fact-checked: 24 September 2026
Reference location for timings: New Delhi
